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- Saturday, April 7, 2018
- तन-मन का वहम (कहानी) #ज़हन
- Art - Azika H.
- एक अंधेरे गलियारे में विजय बेचैनी से घूम रहा था। दूर अपनी पत्नी जीवा की परछाई देख उसकी उलझन कुछ कम हुई।
- "बड़ी देर लगा दी इस बार?"
- जीवा - "हाँ, अमीर लोगों में रिश्तेदार तो कम होते हैं पर उनके चेले-चपाटो की भीड़ इतनी रहती है कि समय लग गया।"
- जीवा अपनी पहचान बदल कर एक निजी अस्पताल से जुड़वाँ बच्चे चोरी कर लायी थी। दोनों की अपेक्षा से उलट काम जल्दी और आसानी से हो गया। कुछ दिन शांत रहने के बाद डीलर से एकसाथ दो बच्चों का बढ़िया दाम मिलने की उम्मीद थी।
- उसी रात जीवा ने विजय को जगाया।
- "सुनो मेरा मन कुछ अजीब सा हो रहा है। तबियत ख़राब लग रही है। तुम्हे पूरे शरीर में खुजली नहीं हो रही?"
- विजय - "हाँ, हरारत सी तो लग रही है। मैं तुझसे पूछने ही वाला था।"
- जीवा ने संकोच से पूछा - "कहीं किसी ने बददुआ तो नहीं दे दी? कोई छाया-प्रेत ना छोड़ दिया हो..."
- विजय - "हाँ! 2 दर्जन बच्चे उठाने के बाद तो जैसे तुझे बड़ी दुआएं मिली होंगी। शायद मौसम बदलने का असर होगा। अभी गोली ले लेते हैं...सुबह देखेंगे।"
- सुबह दोनों के हाल ख़राब हो गये थे। जगह-जगह चकत्ते पड़ गये थे, तेज़ बुखार और हरी-नीली नसें बाहर आने को थी।
- जीवा - "देखो मैंने कहा था ये किसी ऊपरी आत्मा का प्रकोप है। दोनों बच्चे एकदम ठीक हैं। अभी भी समय है, हम बच्चे लौटाकर माफ़ी मांग आते हैं।"
- हर पल बिगड़ती हालत में विजय और जीवा को यही सबसे सही उपाय लगा। बच्चा चोर व्यापार चैन के दोनों मज़दूर, बच्चों को लेकर अस्पताल गये। जल्द ही पुलिस के साथ बच्चों के घरवाले आ गये। जीवा और विजय बच्चों के अभिभावकों से अपने कर्मों की माफ़ी मांगने लगे और खुद से ऊपरी छाया हटाने की विनती करने लगे। तब हवलदार ने उन्हें बताया - "तुमपर कोई प्रेत-व्रत नहीं है। यह युगल अफ्रीका के देश घाना से लौटा हैं। जहाँ से लौटते हुए इन्हे वहाँ फैल रहा रोटोला रोग हो गया है। स्त्री के गर्भवती होने, शुरुआती लक्षण गंभीर होने के कारण दंपत्ति इस अस्पताल में भर्ती हो गया और संयोग से उसी दिन ये दो बच्चे हो गये। माँ से यह संक्रमण बच्चों में आ गया। अगले दिन रोटोला के सही इलाज के लिए इन्हे शहर के बड़े हॉस्पिटल भेजा जाना था कि उस से पहले ही तुमने बच्चे उठा लिये।"
- विजय ने अपनी चुसी हुई काया की शक्ति जुटाकर पूछा - "...तो ये बच्चे कैसे ठीक थे?"
- हवलदार - "ठीक नहीं थे, उनपर दवाई की भारी डोज़ का असर था इसलिए पूरे लक्षण पता नहीं चल रहे थे।।"
- वैसे गलती दोनों की थी पर खीजते विजय का मन जीवा को थप्पड़ मारने का था...उसमें अब शक्ति कहाँ थी।
- समाप्त!
- ==========
- रोग में मिला जोग...स्वर्ग में बनी शादी (कहानी) #ज़हन
- Posted by Mohit Sharma at 4:12 PM
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- Labels: Fiction, Hindi, Life, Mohit Sharma Trendster, Social, Story, what if, ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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