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- Wednesday, February 8, 2017
- रिया के मम्मी-पापा (डार्क कहानी) - मोहित शर्मा ज़हन
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- *कमज़ोर दिल के लोग यह कहानी न पढ़ें।*
- रिया की मम्मी - "मैं और मेरे पति सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं...कम से कम बाहर से कोई मिले या देखता होगा, वह तो यही कहेगा। कुछ महीने पहले हमारी एकलौती बेटी रिया ने आत्महत्या कर ली। उसका वज़न सामान्य से अधिक था, बस इतनी सी बात थी। भला यह भी कोई बात हुई? काश एक बार मुझसे या अपने पिता से अपना जी बाँट लेती। समाज की यही तो रीत है - हर चीज़ में सामान्य होने की एक सीमा/रेंज है। जैसे शादी इतने साल से इतने साल तक हुई तो ठीक इसके बाहर तो बर्बाद, इतना शरीर सामान्य, इसके ऊपर या नीचे बर्बाद, इतनी पढाई ठीक....इसके नीचे बर्बाद! अब हम बड़े तो एकबार सुनकर फिर अपने-अपने काम में लग जाते हैं पर बेचारे बच्चे कहाँ तक समझे और कितना सहें? उनके जीवन में ध्यान बँटाने वाली ज़िम्मेदारियां नहीं होती ना!
- बच्ची की कमी न महसूस हो इसलिए रिया के पापा उसके साथ की तीन और बच्चियाँ उठा लाये। आखिर बाप का दिल है, मैं भी क्या समझाती इन्हें? ये 3 वही लड़कियां हैं जो रिया के मोटापे का मज़ाक बनाती रहती थी। इतना कोमल मन था मेरी बच्ची का, किसी का दर्द नहीं देख पाती थी पर जाने कितने महीने अपना दर्द अनदेखा कर छुपाती रही। उसे लगा होगा कि कभी न कभी ये लड़कियां उसके व्यक्तित्व को सराहेंगी, पेंटिंग, डांस, गायन जैसे उसके हुनर शायद उसको सबकी खासकर इन तीनो की "सामान्य रेंज" में ले आएं। ओह! मैं ज़रा खाना देख आऊं, अंदर तीनो बच्ची लोग भूखी होंगी बाकी आगे रिया के पापा बताएंगे।"
- रिया के पापा - "आप कहोगे क्या दरिंदे हो गए हैं हम पति-पत्नी? इन लड़कियों को क्यों प्रताड़ित कर रहे हैं? अरे किसी चीज़ की कमी नहीं है इन्हें यहाँ। अच्छे कपडे, किताबें, टी.वी. और खाना! मोटापा कम करने के लिए लाइपोसक्शन नाम का एक ऑपरेशन होता है। इस ऑपरेशन में व्यक्ति के शरीर से अतिरिक्त वसा (फैट) निकाला जाता है। रिया 18 साल की होती और एक बार कहती तो तुरंत उसका यह ऑपरेशन करवा देता पर अभी उसमे 2 साल थे। फिर भी मैंने शहर के 2 ऐसे अस्पतालों के चपरासियों से सेटिंग कर ली है। उन दोनों से मुझे हर हफ्ते शहर में कुछ लोगो के लाइपोसक्शन से निकला 25-30 किलो फैट मिल जाता है। उसी को कच्चा या उसके पकवान बना कर इन्हें बड़े प्यार से खिलाते हैं हम दोनों। बताओ कोई अपने बच्चो के लिए भी करेगा इतना? लो बन गया खाना। इन्हें रिया की चौथी फ्रेंड के बारे में नहीं बताया?"
- रिया की मम्मी - "अरे हाँ! तीन नहीं चार थी ये ग्रुप में। तभी हफ्ते का इतना फैट कम पड़ जाता था। वो तो अच्छा हुआ इनमे से एक स्टोर रूम से भागने की कोशिश में रिया के पापा के हाथ आ गई। फिर मैंने और इन्होंने उस लड़की को फैट के कनस्तर में डाला....फिल्मो, सीरियलों में जैसे दलदल में डूबते दिखाते हैं लोगो को वैसे धीरे-धीरे डूबी वो लड़की। ठीक ही हुआ! वो लड़की ही सबसे ज़्यादा चींचां और उल्टियाँ करती थी बाकी तीन तो शांत हैं बेचारी। ये सब छोडो आप अपनी सुनाओ? इस बार खाना खाये बिना नहीं जाने देंगे आपको..."
- समाप्त!
- Posted by Mohit Sharma at 4:15 AM
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- Labels: Dark, Experimental, Fiction, Hindi, Mohit (Trendster), Mohitness, Society, Story, Suspense, Update, ट्रेंडस्टर, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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