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- Monday, November 6, 2017
- खौफ की खाल (नज़्म) #ज़हन - पगली प्रकृति कॉमिक
- <image>
- Poetry and artwork from Pagli Prakriti (Vacuumed Sanctity) Comic
- खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
- ...और नदी अपनों को बहा कर ले गयी!
- बहानों के फसाने चल गये,
- ज़मानों के ज़माने ढल गये...
- रुक गये कुछ जड़ों के वास्ते,
- बाकी शहर कमाने चल दिये।
- खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
- गुड़िया फ़िर भूखे पेट सो गयी...
- समझाना कहाँ था मुश्किल,
- क्यों समीर को मान बैठे साहिल?
- तिनकों को बिखरने दिया,
- साये को बिछड़ने दिया?
- खौफ की खाल उतारनी रह गयी,
- रुदाली अपनी बोली कह गयी...
- रौनक कहाँ खो गयी?
- तानो को सह लिया,
- बानो को बुन लिया।
- कमरे के कोने में खुस-पुस शिकवों को गिन लिया।
- खौफ की खाल उतार दो ना...
- तानाशाहों के खेल बिगड़ दो ना!
- शायद उतरी खाल देख दुनिया रंग बदले,
- एक दुकान में गिरवी रखा हमारा सावन...
- शायद उस दुकान का निज़ाम बदले!
- घिसटती ज़िन्दगी में जो ख्वाहिशें आधी रह गयीं,
- कुछ पल जीकर उन्हें सुधार दो ना!
- खौफ की खाल उतार दो ना...
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- #mohitness #mohit_trendster #abhilash_panda #freelance_talents
- Posted by Mohit Sharma at 12:25 AM
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- Labels: Art, Comics, Freelance Talents, Mohit Sharma Trendster, Mohitness, nazm, Poems, ज़हन, ट्रेंडस्टर
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