sudarsh

Hindi-New Text Translated

Feb 23rd, 2014
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  1. गरजा आज फिर उस औरत को ले कर आया था. वही दुबली पतली, मोटी मोटी आँखें, तीखी नाक और साँवले रंग वाली औरत.
  2. पिछला तीन माह मैं यह औरत सातवीं बार आ चुकी है. सुमित्रा ने देखा तो पल भर के लिए सहम सी गयी/गई. काले सूट मैं यह औरत उसे किसी चुड़ैल से कम नहीं लग रही थी. मगर यह सफेद भी पहन ले है तो चुड़ैल ही. किस तरह से उसके घर को खाये/खाए चली जा रही है, सुमित्रा ने मन ही मन मैं सोचा.
  3. यह बिटर बिटर क्या देखे जा रही है? अंदर जा और तेजी से दो प्याला चाय बना कर ला. गरजा चिल्लाया तो सुमित्रा ने झट से अपने को संभाला. वह तेजी से रसोई की ओर मुड़ी थी.
  4. रसोई मैं आते ही सुमित्रा के अंदर का बंद आँखों के रास्ते फूट पड़ा. एक बार तो वह फफक पड़ी थी. मगर उगले ही क्षण उस ने दुपट्टे को दाँतों के बीच ठूस लिया. कहीं रोने की आवाज़ गरजा तक पहुँच गयी/गई तो उस की खैर नहीं.
  5. पहली बार जब सुमित्रा के रोने की आवाज़ गरजा के कानों तक पहुँची थी तो वह दहाड़ता हुआ अंदर आया था – यह गुटरगूँ क्या लगा रखी है? बंद कर यह मगरमच्छ के आँसू. सुमित्रा की ज्यादा परवाह किये/किए बिना गरजा उस औरत को ले कर अपने कमरे मैं बंद हो गया था.
  6. यह सब क्या है, सुमित्रा समझ नहीं पा रही थी. उस का शरीर ठंडा पड़ गया था. जबान तो जैसे किसी ने काट ही डाली हो.
  7. एक ही कमरा है गरजा के पास और उस मैं भी वह पराई औरत को ले कर बंद हो गया. ऐसा तो सुमित्रा ने न कभी देखा न सुना था. अपना यह दिख वह कहे भी किस से. लोगों के लिए तो तमाशा बनके/बनकर रह जाये/जाए गा. अम्मा से ? न , न ! रो रो कर जान गंवा देगी.
  8. पूरे तीन घंटे वह औरत अंदर रही थी. और इन तीन घंटे मैं सुमित्रा रसोई की दीवार से छिपकली की तरह चिपकी रही थी. उस औरत के जातें ही गरजा रसोई मैं घुसा था. कुछ दाल रोटी बनायी/बनाई कह नहीं?
  9. सुमित्रा उसी दशा मैं बैठी रही तो गरजा उस ठोड़ी को ऊपर उठाते हुये/हुए बोला था.
  10. आँखों को दुपट्टे से #पोछ हुयी/हुई सुमित्रा उठी थी. गरजा की साफ सी बातों से वह नर्म भी पड़ गयी/गई. खुद को गरजा की छाती से सटाती बोली थी , मुझे/मुझको तो नहीं छोड़ दे गा तो?
  11. कैसी बात करती है तो! मेरे पर भरोसा नहीं तैरे को? गरजा देर तक सुमित्रा के बालों को सहलाता रहा. सुमित्रा के अंदर का गुस्सा धीरे-धीरे ढलता चला गया था. प्यार भरी नज़रों से वह गरजा की ओर देखते हुये/हुए बोली थी , गरजा तो अगर मुझे/मुझको सच मैं चाहता है तो कह कह आगे से उस औरत को नहीं लाये/लाए गा.
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