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- Wednesday, April 4, 2018
- एड्रनलिन रश वाली झुरझुरी (कहानी) #ज़हन
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- दिलीप ने चलती गाड़ी से शराब की बोतल सड़क पर पटकी। नशे में कार चला रहे उसके दोस्त हफ़ीज़ ने उसे टोका।
- "ऐसे बोतल नहीं फेंकनी चाहिए! जानवरों और लोगों के पैरों में कांच चुभ सकता है। दुपहिया वालों का एक्सीडेंट हो सकता है।"
- दिलीप ने उसे झिड़का - "साले! पापा को मत सीखा और कार भी नशे में नहीं चलानी चाहिए....लोग मर सकते हैं। फ़िर भी चला रहा है ना तू?"
- हफ़ीज़ का मूड़ ठीक करने के लिए दिलीप दार्शनिक स्टाइल में आ गया।
- "शराब, चरस में टुन्न रहना ही नशा नहीं है। भाई जीवन जी, मौज कर....एड्रनलिन रश को समझ! यूँ बिना देखे कार घुमा देना, बिना सोचे बोतल से लेकर किसी बेवक़ूफ़ की हड्डी तोड़ देना इस सब से जो झुरझुरी मचती है शरीर में उसे महसूस कर। भाड़ में गयी दुनिया!"
- हफ़ीज़ की आशंका सच हो गयी और बोतल का बड़ा टुकड़ा अँधेरे में सड़क पार करती एक महिला माया की चप्पल चीरता हुआ उसके पैर में घुस गया। चोट के कारण अगले दिन माया जिस घर की सफाई और बर्तन करने जाती थी वहाँ जाने में लेट हो गयी। इधर सुबह-सुबह दिलीप को अचानक खांसी का दौरा उठा और शराब-गांजे के नशे में उसके मुँह और सांस की नली में उल्टी भर गयी। घर के बाकी सदस्य नींद में होने और माया के देर से आने के कारण जीवन के लिए दिलीप के संघर्ष को कोई सुन नहीं पाया। दिलीप उसी दुनिया में सांस लेने को तड़प रहा था जिसे अक्सर भाड़ में भेजकर उसे एड्रनलिन रश वाली झुरझुरी मिलती थी। कुछ ही समय में उसकी मौत हो गयी।
- अपने बिगड़ैल बेटे को खोकर बिलख रहे परिवार के बीच माया सिसक रही थी। काम के बहाने खाली कमरे की आड़ में आकर उसकी सिसकारी हल्की हँसी में बदल गयी। आखिर एड्रनलिन रश की झुरझुरी पर केवल अमीरों का हक़ थोड़े ही है।
- समाप्त!
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- New article - भूमिका या परिणाम? #ज़हन
- Posted by Mohit Sharma at 4:45 PM
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- Labels: chain, emotions, Hindi, Life, Message, Mohit (Trendster), Mohitness, observation, Society, Story, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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