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- Tuesday, July 11, 2017
- पैमाने के दायरों में रहना... (नज़्म) #ज़हन
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- पैमाने के दायरों में रहना,
- छलक जाओ तो फिर ना कहना...
- जो जहां लकीरों की कद्र में पड़ा हो
- उस से पंखों के ऊपर ना उलझना...
- किन्ही मर्ज़ियों में बिना बहस झुक जाना,
- तुम्हारी तक़दीर में है सिमटना...
- पैमाने के दायरों में रहना,
- छलक जाओ तो फिर ना कहना...
- क्या करोगे इंक़िलाब लाकर?
- आख़िर तो गिद्धों के बीच ही रहना...
- नहीं मिलेगी आज़ाद ज़मीन,
- तुम दरारों के बीच से बह लेना...
- पैमाने के दायरों में रहना,
- छलक जाओ तो फिर ना कहना...
- जिस से हिसाब करने का है इरादा,
- गिरवी रखा है उसपर माँ का गहना...
- औरों की तरह तुम्हे आदत पड़ जाएगी,
- इतना भी मुश्किल नहीं है चुपचाप सहना...
- पैमाने के दायरों में रहना,
- छलक जाओ तो फिर ना कहना...
- साँसों की धुंध का लालच सबको,
- पाप है इस दौर में हक़ के लिए लड़ना...
- अपनी शर्तों पर कहीं लहलहा ज़रूर लोगे,
- फ़िर किसी गोदाम में सड़ना...
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- - मोहित शर्मा ज़हन
- #mohitness #mohit_trendster #freelance_talents #trendyaba
- Read बहाव के विरुद्ध (कहानी) #ज़हन
- Posted by Mohit Sharma at 11:52 PM
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- Labels: Experimental, Freelance Talents, Ghazal, Hindi, Life, Mohit (Trendster), Mohitness, nazm, observation, Poem, Urdu, ट्रेंडस्टर, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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