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- पुलिस बनाम जनता (लघुकथा)
- एक समाचार वार्ता, खबर विश्लेषण प्रोग्राम में विचारकों, समाज सेवको, विशेषज्ञों, जनता और न्यूज़ एंकर ने वहाँ उपस्थित पुलिस अधीक्षक पर सवालो, कटाक्ष और पुलिस की आलोचना करती हुयी बातों की वर्षा कर दी। अपनी सफाई देने के लिए या योजनाएं-उपलब्धियां बताने के लिए वो जैसे ही होते तभी कहीं से तीखे शब्दों के तेज़ बाण वार्ता का रुख अपनी ओर कर लेते। कुछ ही देर में अधीक्षक महोदय अपनी लाचारी से खीज गये, और जवाब देने की आतुरता खोकर सबकी बातें सुनने लगे। अलग लोगो कि बातें अलग पर उन्होंने एक ट्रेंड गौर किया सबकी बातों मे जो मुख्यतः ये थी -
- "इस लचर व्यवस्था पर क्या कहना चाहेंगे आप?", "इस मेट्रो शहर में हर रोज़ होते अपराधो पर है कोई जवाब आपके पास?", "कैसी बेदम और भ्रष्ट है यह पुलिस?"
- अंततः उन्हें कार्यक्रम के अंत से ज़रा पहले औपचारिकता के लिए अपनी सफाई देने के लिए कहा गया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि कोई वाकई में उनकी बात सुनने में इच्छुक है। अब तक वो अपनी रिपोर्ट्स के अंक-निष्कर्ष, भावी योजनाओ का सारांश आदि भूल चुके थे। इसलिए उन्होंने अपनी सफाई कम शब्दों में दी।
- पुलिस अधीक्षक - "टैक्स-बिजली-अनाज चोरी से लेकर खून खराबे, दंगो तक खुद जनता को सारे कलयुगी काम करने है और पुलिस उन्हें सतयुग से उतरी चाहिए! पुलिसवाले अमावस की रात स्पेसशिप से उतरे एलियंस नहीं होते, इसी समाज से निकले लोग होते है....जैसी जनता - वैसी पुलिस....सिंपल!...बल्कि इस पैमाने के आधार पर तो जैसी जनता है उस हिसाब से यहाँ पुलिस काफी बेहतर है।"
- - मोहित शर्मा (ज़हन) #mohitness #mohit_trendster #trendy_baba
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