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- नशेड़ी औरत
- कितने चेहरो में एक वो चेहरा था...
- नशे में एक औरत ने कभी श्मशान का पता पूछा था...
- आँखों की रौनक जाने कहाँ दे आई वो,
- लड़खड़ाकर भी ठीक होने के जतन कर रही थी जो।
- किस गम को शराब में गला रही वो,
- आँसू लिए मुस्कुरा रही थी जो।
- अपनी शिकन देखने से डरता हूँ,
- इस बेचारी को किस हक़ से समझाऊं?
- झूठे रोष में उसे झिड़क दिया,
- नज़रे चुराकर आगे बढ़ गया।
- आज फिर मेरा रास्ता रोके अपना रास्ता पूछ रही है....
- ठीक कपड़ो को फिर ठीक कर रही है....
- हिचकियां नशे की,
- पगली कहीं की!
- "क्या मिलता है नशे में?"
- "उसे रोज़ बुलाती,
- थक जाने तक चिल्लाती,
- नशे में वो मर गया,
- मेरा जी खाली कर गया।
- पीकर आवाज़ लगाने पर आता है,
- मन भरने तक बतियाता है,
- अब आप जाओ साहब!
- मेरा पराये मरद से बात करना उसे नहीं भाता है।"
- - मोहित शर्मा ज़हन
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