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- नोट - हिम्मत नहीं हारनी चाहिए कहना बहुत आसान है। आज एक लेखक के रूप में इस मुश्किल बीमारी से जूझ रहे लोगों को मैं यह कहने की आसान नादानी कर रहा हूँ। कहानी अंत तक पढ़ेंगे तो हास्य रस के साथ एक शिक्षा भी है। साथ ही मेरा निवेदन है कि आप सब National AIDS Control Organisation (NACO), Naz Foundation, Bill & Melinda Gates Foundation, India HIV/AIDS Alliance, Solidarity and Action Against The HIV Infection in India (SAATHII) आदि संस्थाओं को ऑनलाइन या आस-पास खोजें और उनसे किसी भी तरह जुड़कर एड्स के विरुद्ध लड़ाई में अपना योगदान दें। धन्यवाद!
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- कहानी
- वर्ष 1871
- स्थान - मध्य भारत में एक जंगली क्षेत्र
- सौम्य नामक ऋषि एक कायदे के पहुँचे हुए संत थे। ऐसे जिनका औरा भारत से लेकर तोरा बोरा तक फैला था। किशोरावस्था से ही साधना में लीन होकर उन्होंने इतनी गुडविल बनायीं थी। अब वो अपनी भक्ति को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी में थे। ईश्वर को पाने की तपस्या में कुछ हफ़्तों से उन्होंने अन्न जल का त्याग रखा था। सौम्य ऋषि का योग तप अब किसी भी क्षण अपने परम लक्ष्य की प्राप्ति कर सकता था। अब ये तो हो गयी आदर्श जीवन की बात जहाँ जीवन में कोई फ्रिक्शन नहीं होता। मेहनत करो और फल लो....पर भगवान टेस्ट लेते हैं, मेहनत से अलग और टेस्ट ताकि सही में भी सही व्यक्ति का चयन हो सके या व्यक्ति दुनिया से पिट-पिट कर पक्का हो ले। इन परीक्षाओं को लेने के लिए ईश्वर कई कुत्ते प्राणियों को धरती पर औरों की मेहनत को लौकी का रायता बनाने के लिए भेजते हैं। सौम्य ऋषि ख़ास थे तो उनके लिए भेजी गयी बाधा भी स्पेशल थी। एक कुकुर अ-प्राणी! सदियों से सोया हुआ रक्तपिपासु वैम्पायर - चुस्सू जो एक भूकंप के बाद जाग उठा था और सतपुड़ा जंगल में सौम्य ऋषि की साधना स्थल के पास भटक रहा था।
- वैसे जंगल में अनगिनत प्राणी थे पर चुस्सू को सौम्य ऋषि की सौम्यता ऐसी चुभी कि सबसे पहले वह उन्हें काटने को झपटा। जीभ लपलपाते चुस्सू का पैर एक पत्थर में अटका...और इतनी गति में पूरे भार के साथ उसने ध्यानमग्न सौम्य ऋषि को रग्बी टैकल करके गिराया। टीले से गिरकर सौम्य ऋषि के खोपड़े में डीजे सुकेतु के धूमकेतु ट्रैक्स बजने लगे। जीवन में पहली बार उन्होंने अपनी सौम्यता छोड़ अपशब्दों का मस्त फव्वारा छोड़ा। उनकी तपस्या टूट गयी। इतने समय से जो संयम, तप जमा किया था सब व्यर्थ गया। पहले उन्होंने अपना शरीर चेक किया कि टीले से गिरने पर सिर में जो टीला पड़ा है उसके अलावा तो कहीं कुछ नहीं हुआ। ...और फिर भाईसाहब जो उन्होंने चुस्सू के जूत (खड़ाऊ) बजाये हैं। तप व्यर्थ हुआ था पर ऋषि में अभी भी काफी साधना बल था। यहाँ तक कि वो धूल धक्कड़ से सख्त हुआ उनका चोट्टा भी घुमा घुमा के मार रहे थे। इतनी मार खाकर चुस्सू का ब्लैडर सू-सू से खाली हो गया। फिर सौम्य ऋषि ने अभिमंत्रित बोरी में बांध कर उसे पाताल में गाड़ दिया। सौम्य ऋषि फिर तपस्या में लग गए और रिटायरमेंट की एज से पहले आख़िरकार उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ।
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- वर्ष 2019
- स्थान - अमरकंटक, मध्य प्रदेश
- शहर के एक अस्पताल में रोमिल अपने बिस्तर पर दोस्तों से घिरा लेटा था। हर कोई उसके उदास चेहरे पर हल्की मुस्कराहट लाने के जतन कर रहा था पर रोमिल तो जैसे शून्य में मग्न अपने जीवन को कोस रहा था। दीवार की ओर एकटक देखता और दोस्तों के सवालों पर हाँ-हूँ-हम्म करता वह आत्महत्या के ख्याल सोच रहा था। अभी आत्महत्या के प्रयास में उसने नींद की कई गोलियां खा ली थी पर परिजन समय पर अस्पताल ले आये। कल ही की तो बात है - कॉलेज का स्टार टेनिस खिलाडी, पढाई में बेहतरीन - हर किसी की नज़र में रोमिल का भविष्य उज्जवल था। फिर एक बहस के बाद बढ़ी लड़ाई में कॉलेज के बदमाश लड़कों ने ज़बरदस्ती पकड़ कर एड्स वायरस संक्रमित सुई रोमिल को लगा दी। घटना के अपराधी तो जेल में थे पर रोमिल अवसाद में चला गया था। उसे लगता था कि समाज योगदान में जो सपने उसने देखे थे वो सब अधूरे रह गये। अब किसी उपलब्धि, काम में उसका मन नहीं लगता था। आत्महत्या के प्रयास तो किये पर शायद इतनी हिम्मत नहीं थी कि उन प्रयासों को 'पक्का' अंजाम दे सके। आखिरकार अपनों से मिले प्यार से बचे जीवन से संधि कर रोमिल ने जीने की ठानी। उसकी स्वयंसेवी संस्था अदालत के मामलों में फसे गरीबों की मदद करती थी। काफी कम समय में उसने कई लोगों की मदद की थी। इसके बावजूद रोमिल के मन में एक कसक थी कि जितना वह समाज को पूर्ण स्वस्थ रूप में दे सकता था उतना एड्स पीड़ित होकर संभव नहीं था।
- कुछ वर्षों बाद एड्स के कारण कम हो चुकी रोग प्रतिरोधक क्षमता रोमिल को फिर से अस्पताल के बिस्तर ले आयी। इस बार फैले संक्रमण से रोमिल के बचने की उम्मीद नहीं थी, अब वह बस कुछ दिनों का मेहमान था। उसकी संस्था का काम अच्छा चल रहा था और इस बीच निष्क्रिय सा होकर मौत का इंतज़ार करना उसके लिए दुनिया की सबसे बदतर सज़ा थी। कुछ ऐसा कि जैसे आपको कहीं बांध दिया हो और आप हिल-डुल तक नहीं सकते। ऊपर से आपको सोने नहीं दिया जा रहा और आपके माथे पर धीरे-धीरे पानी की बूँदें गिर रही हैं। धीरे-धीरे...बूँद तो टपक रही है पर आपको पता ही नहीं अगली बूँद कब टपकेगी। कुछ देर सहन करने के बाद जो सिर दर्द होगा, वैसा कुछ रोमिल को हर वक़्त महसूस हो रहा था। जो अवसाद के अंकुर अपनों के प्रेम और संस्था में दूसरों की मदद करने से दब गये थे उनमें फिर से जान आ गयी थी। रोमिल सोच रहा था कि 27 साल में दुनिया को अलविदा कहने से बेहतर होता कि वह इस दुनिया में आता ही नहीं। एक विचार ये आया कि चलो अच्छा हुआ इस बार आत्महत्या नहीं करनी पड़ेगी, कुछ दिनों में खुद ही मौत आ जायेगी। पहले जो परिवार वालों, दोस्तों का उत्साहवर्धन काम कर गया था इस खबर के बाद तो वो भी जाता रहा।
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- लगभग डेढ़ सदी बाद उस जगह का नक्शा बदल चुका था जहाँ चुस्सू दबा था। बढ़ती आबादी और मानव आकांक्षाओं के कारण जंगल का एक बड़ा हिस्सा शहरीकरण की चपेट में आ चुका था। कई दशकों बाद उस जगह का नक्शा बदल चुका था जहाँ चुस्सू दबा था। बढ़ती आबादी और मानव आकांक्षाओं के कारण जंगल का एक बड़ा हिस्सा शहरीकरण की चपेट में आ चुका था। सीवर की खुदाई के काम में अपने काम से प्यार करने वाले अतिउत्साही मज़दूरों ने ऐसे कुदाल-फावड़े चलाये कि सुप्तावस्था के सपनो में धूम मचा रहे चुस्सू वैम्पायर की बोरी फटी और खोपड़ी में क्रैक आया सो अलग। इस आघात से चुस्सू जाग उठा और रक्त की प्यास बुझाने के लिए वह शहर की दिशा में चल पड़ा।
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- चुस्सू शहरी कॉलोनियों को देखकर चक्कर में पड़ गया। कितनी अजीब थी ये दुनिया। कहाँ गयी वो हरियाली...वो शान्ति? बेचारे का गला प्रदूषित हवा में खांस-खांस कर बच्चों का झुनझुना बन गया। गाड़ियों के हॉर्न, बाजार में बज रहा संगीत उसकी क्रैकड खोपड़ी से होकर उसे खनका रहा था। गुस्से में वह पास की ईमारत में घुस किया। ये वही अस्पताल था जहाँ रोमिल भर्ती था। चुस्सू इतना फ़्रस्टेटेड था कि खून चूसने का अपना प्राथमिक काम छोड़कर पहले तो उसने जो सामने आया उसको हपक के पीटा। यहाँ घूँसा वहां लात, फिर जब उसका गुस्सा कुछ कम हुआ तो उसे खून चूसने का काम याद आया। हल्ला मच गया! जो भाग सकता था सरपट इधर-उधर हो लिया। पीछे छूटे कुछ मरीज़ मरने की एक्टिंग करने लगे और कुछ वैम्पायर को देख कर वाकई मर गये। रोमिल की अंतिम साँसें चल रही थी। बाहर हुए हंगामे की उसे भनक नहीं लगी। चुस्सू उसके कमरे में घुसा।
- रोमिल मौत पर मुस्कुरा रहा था। चुस्सू ने उड़ता तीर ले लिया।
- "मुझपर मुस्कुरा रहा है। वैम्पायर सम्राट चुस्सू पर? ये ले..."
- इतना कहकर उसने रग्बी टैकल अंदाज़ में रोमिल पर छलांग मारी और रोमिल की गर्दन पर अपने दांतों का इंजेक्शन गाड़ दिया। रोमिल ने उस से एक क्षण पहले ही प्राण त्यागे थे पर एड्स संक्रमित खून चुस्सू के अंदर जा चुका था। ये रग्बी टैकल में छलांग मारना इस गधे के लिए बड़ा मनहूस था। इस से पहले ऐसा करने पर सौम्य ऋषि ने इसके जूत बजाये थे और इस बार चुस्सू ने एड्स पीड़ित का खून पी लिया।
- ये क्या हो रहा है? अंदर गिलगिला सा क्यों लग रहा है? मुर्दाना कमज़ोरी सी क्यों लग रही है? दांतों में सेंसिटिविटी लग रही है। मज़ा सा क्यों नहीं आ रहा ज़िन्दगी में? हाय मेरी पीठ कुलकुलु क्यों हो गयी? दांत टूट के गिर गये? पोले मुँह वाला दुनिया का पहला वैम्पायर नहीं बनना मुझे! भगवान, ये चीटिंग है! एक तो इतने दिनों बाद उठा हूँ और उसपर पहले शिकार पर ही मेरा व्यभिचार करवा दिया।
- चुस्सू से डरकर कोने में छुपी एक वृद्ध नर्स की हँसी छूट गयी।
- चुस्सू - "ए गंदी वाली बुढ़िया, ये क्या हो रहा है मेरे साथ?"
- नर्स - "तुझे एड्स हो गया है, गधे...के पिल्ले!"
- चुस्सू - "क्या यही प्यार है? तुम लोगो की दुनिया में क्या ये प्यार का नया नाम है?"
- नर्स - "पागल पोपले हैवान, ये एक बीमारी है।"
- चुस्सू - "अब खाली टाइम में तुम लोग बीमारियां भी ईजाद करने लगे? ऐसी भी क्या बोरियत? 150 साल पहले तो ऐसा कुछ नहीं था?"
- नर्स - "हाँ नयी आयी है ये बीमारी, एक बार लगती है तो हटती नहीं और अभी तक पक्का इलाज नहीं मिला है। अब तेरा कुछ नहीं हो सकता। अगर बदतमीज़ी से बात नहीं करता तो तेरे इलाज के लिए मैं ही कुछ मदद करवाती, जहाँ से आया है वहीं चला जा। "
- चुस्सू सिर पकड़कर ऊपरवाले से एकतरफा बात करने लगा।
- "हे ईश्वर, मानता हूँ कि दुष्टों का सर्वनाश होना चाहिए, उनकी भद पिटनी चाहिए पर कुछ मौके मिलने के बाद हो ना ऐसा...लाइफ कुछ एन्जॉय कर लें हम पिशाच लोग तो क्या पहाड़ टूट पड़ेगा?"
- रोमिल का अवसाद शक्तिहीन चुस्सू ने ले लिया था। निराश चुस्सू सदा के लिए एकांत में रहने के लिए जंगल की ओर कूच कर गया। समाज की सही सेवा ना कर पाने के मलाल में जी रहे और बेमतलब खुद को परेशान कर रहे रोमिल ने ना सिर्फ अपने जीवित रहते कई गरीबों को अदालत में इंसाफ दिलवाया बल्कि मरते हुए अपने शहर और देश के कई लोगों को चुस्सू वैम्पायर की चपेट में आने से बचाया।
- लाइलाज बीमारी व्यक्ति की आयु या काम करने की क्षमता कम कर सकती है पर अपने बचे हुए जीवन, अर्जित ज्ञान और हिम्मत के साथ वह समाज में बड़े से बड़ा योगदान दे सकता है। निराश होकर अवसाद में जाने के बजाय सामने मिले अवसरों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आशा है ऐसी बीमारियों से जूझ रहे पाठक संघर्ष करने का होंसला बनाये रखेंगे। अपने प्रयासों से संतुष्ट रहकर जीवन का आनंद लेंगे।
- समाप्त!
- #ज़हन mohit trendster
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