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- Wednesday, May 23, 2018
- ख्याल...एहसास (ग़ज़ल) #ज़हन
- Khayaal...Ehsaas (Ghazal) #zahan
- एक ही मेरा जिगरी यार,
- तेरी चाल धीमी करने वाला बाज़ार...
- मुखबिर एक और चोर,
- तेरी गली का तीखा मोड़।
- करवाये जो होश फ़ाख्ता,
- तेरे दर का हसीं रास्ता...
- कुचले रोज़ निगाहों के खत,
- बैरी तेरे घर की चौखट।
- दिखता नहीं जिसे मेरा प्यार,
- पीठ किये खड़ी तेरी दीवार...
- कभी दीदार कराती पर अक्सर देती झिड़की,
- तेरे कमरे की ख़फा सी खिड़की।
- शख्सियत को स्याह में समेटती हरजाई
- मद्धम कमज़र्फ तेरी परछाई...
- कुछ पल अक्स कैद कर कहता के तू जाए ना...
- दूर टंगा आईना।
- जाने किसे बचाने तुगलक बने तुर्क,
- तेरे मोहल्ले के बड़े-बुज़ुर्ग।
- ...और इन सबके धंधे में देती दख़्ल,
- काटे धड़कन की फसल,
- मेरी हीर की शक्ल...
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- Posted by Mohit Sharma at 11:41 AM
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- Labels: emotions, Ghazal, Hindi, Life, love, memory, Mohit (Trendster), Mohitness, Romantic, Urdu, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Balaganj, Lucknow, Uttar Pradesh 226003, India
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