Mohit-Trendster

New Ghazal #zahan #mohitness

May 23rd, 2018
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  1. Wednesday, May 23, 2018
  2. ख्याल...एहसास (ग़ज़ल) #ज़हन
  3. Khayaal...Ehsaas (Ghazal) #zahan
  4.  
  5. एक ही मेरा जिगरी यार,
  6. तेरी चाल धीमी करने वाला बाज़ार...
  7. मुखबिर एक और चोर,
  8. तेरी गली का तीखा मोड़।
  9. करवाये जो होश फ़ाख्ता,
  10. तेरे दर का हसीं रास्ता...
  11. कुचले रोज़ निगाहों के खत,
  12. बैरी तेरे घर की चौखट।
  13.  
  14. दिखता नहीं जिसे मेरा प्यार,
  15. पीठ किये खड़ी तेरी दीवार...
  16. कभी दीदार कराती पर अक्सर देती झिड़की,
  17. तेरे कमरे की ख़फा सी खिड़की।
  18. शख्सियत को स्याह में समेटती हरजाई
  19. मद्धम कमज़र्फ तेरी परछाई...
  20. कुछ पल अक्स कैद कर कहता के तू जाए ना...
  21. दूर टंगा आईना।
  22. जाने किसे बचाने तुगलक बने तुर्क,
  23. तेरे मोहल्ले के बड़े-बुज़ुर्ग।
  24.  
  25. ...और इन सबके धंधे में देती दख़्ल,
  26. काटे धड़कन की फसल,
  27. मेरी हीर की शक्ल...
  28. =======
  29. Posted by Mohit Sharma at 11:41 AM
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  36. Labels: emotions, Ghazal, Hindi, Life, love, memory, Mohit (Trendster), Mohitness, Romantic, Urdu, मोहित शर्मा ज़हन
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