Not a member of Pastebin yet?
Sign Up,
it unlocks many cool features!
- अंतर (लघु कहानी) #ज़हन
- <image>
- पुलिस निरीक्षक शलभ कुमार को टी.ए. अलाउंस भरते देखे उनके साथी ने उन्हें टोका।
- "क्या यार जब देखो कोई ना कोई फॉर्म भरते रहते हो या साहब के दफ्तर भागते रहते हो। साल भर के काम की रेटिंग में 2-4 नंबर ज़्यादा पा जाओगे तो कहाँ तीर मार लोगे। तुम भी यहीं उतनी दौड़-भाग कर रहे हो और बाकी तुम्हारे समकक्ष लोग भी। थोड़ा एन्जॉय करो लाइफ! अब तक 50 बार फॉर्म भरते देखा होगा तुम्हे जिसमे से सालों बाद कोई एक-दो अलाउंस मिला होगा डेढ़-दो हज़ार का, इस से बढ़िया रिलैक्स करते। सरकारी नौकरी है, सब सेट है और क्या चाहिए?"
- शलभ ने हँस कर बात टाल दी। कुछ वर्षो बाद जब शलभ का बैच सेवानिवृत्त होने वाला था तब उसके साथ के सभी अधिकारी उस से एक या दो रैंक नीचे थे, साथ ही शलभ की पेंशन उनके कई साथियों से 15-20 हज़ार रुपये प्रति माह अधिक तय होने वाली थी। 37 वर्षों की नौकरी में हर वर्ष जो 2-3 नंबर, इंसेंटिव शलभ ने बिना कोताही जुटाये थे उसका फल उसे अब मिल रहा था। उस बैच के कुछ अफसर अपनी पेंशन 3-4 हज़ार बढ़वाने की उम्मीद में नौकरी के अंतिम महीनो में रिकॉर्ड की नेगेटिव एंट्रीज़ हटाने की भाग-दौड़ में लगे हुए थे।
- समाप्त! #mohitness #mohit_trendster #trendybaba #freelancetalents #mohitsharma #hindi #story #fiction
Add Comment
Please, Sign In to add comment