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- पोएटिक पोस्ट : मेरी आज़ादी का रुआब - मोहित शर्मा (ज़हन)
- नमस्ते! दुनियाभर में अनेको लोग अपनी इच्छा के विरुद्ध किसी संस्था, प्रभावशाली व्यक्ति, विचारधारा, सामाजिक प्रणालियों की परछाई में अपना जीवन काट देते है। उनसे अधिक दुर्भाग्यशाली लोग ऐसे होते है जो इतने जागरूक ही नहीं हो पाते कि अपनी सोच बना पायें। स्थापित प्रणाली पर बिना सवाल उठाये भेड़चाल का हिस्सा बन अपना जीवन काट देते है। उन्ही परिस्थितियों में काफी कम संख्या में लोग गलत परन्तु प्रचलित बातों के खिलाफ आंदोलन करते है। शांत, संतुष्ट जनता का बड़ा बहुमत होने के कारण सरकारों एवम शासको के लिए ऐसे विद्रोहों, आंदोलनों को कुचलना आसान बन जाता है।
- अक्सर ऐसी कई आहुतियों की लपट हम तक पहुँच नहीं पाती। जैसे सूखी लकड़ियों और घी-कपूर में प्रज्वलित अग्नि में हवन सामग्री स्वाहा हो जाती है, वैसे ही शायद इस संघर्ष का महत्त्व इन इकाई बलिदानो में साफ़ ना दिख पाये पर लगातार मंत्रो के बाद पड़ रही हवन सामग्री अग्नि की प्रचंडता समाप्त कर देती है, ठीक वैसे ही लगातार छोटे-छोटे संघर्षों की बूँदें एक सैलाब बनकर भव्य शासको, शक्तिशाली विचारधारों को बहा ले जाती है। जनता को पूरे न्याय की ना जानकारी होती है और ना ही उम्मीद पर समस्या तब आती है जब बूँद-बूँद के लिए करोडो, अरबों को घिसटते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है। हर सक्षम नागरिक कि नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि असल और ढोंग के संघर्षों में फर्क करते हुए अपने कम भाग्यशाली देशवासियों की मदद में योगदान दे, प्रयासरत रहे। इस काव्य कॉमिक की प्रेरणा मुझे तिब्बत संघर्ष में बरसो से खुद को जलाकर, अपनी बलि दे रहे प्रदर्शनकारियों से मिली।
- यह यश ठाकुर ( हरीश अथर्व) जी कि पहली कॉमिक है जो काफी समय से अटकी हुयी थी, आखिरकार उनकी मेहनत सबके सामने है जिसके लिए उन्हें बहुत बधाई! हालाँकि, इस बीच उनकी कला में काफी सुधार आया है। पाठको और फेनिल शेरडीवाला जी के सुझावों, अवलोकन अनुसार आगे बेहतर काम आप सभी के सामने होगा।
- आपका
- मोहित शर्मा (ज़हन) #mohitness #mohit_trendster #trendy_baba
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