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- Saturday, February 3, 2018
- नये उपन्यास में नज़्म
- शुभानंद कृत मास्टरमाइंड (जावेद, अमर, जॉन सीरीज) नॉवेल में प्रकाशित नज़्म।
- अभी तो सिर्फ मेरी मौजूदगी को माना,
- दिमाग में दबे दरिन्दों से मिलकर जाना।
- तुझे तड़पा-तड़पा कर है खाना,
- पीछे दरिया रास्ता दे तो चले जाना।
- कभी किसी की चीख से आँखों को सेका है?
- कभी बच्चे का जिस्म तेज़ाब से पिघलते देखा है?
- अभी वक़्त है...रास्ते से हट जाओ,
- किसी का दर्द दिखे तो पलट जाओ।
- जिसकी दस्तक पर दिलेरी दम तोड़ती है...
- मौत से नज़रे मत मिलाओ!
- क़ातिल आँधियों मे किसका ये असर है?
- दिखता क्यों नहीं है हवा मे जो ज़हर है?
- चीखें सूखती सी कहाँ मेरा बशर है?
- ये उनका शहर है...
- धुँधला आसमां क्यों शाम-ओ-सहर है?
- आदमख़ोर जैसा लगता क्यों सफ़र है?
- ढ़लता क्यों नहीं है ये कैसा पहर है?
- ये उनका शहर है...
- जानें लीलती है ख़ूनी जो नहर है.
- माझी क्यों ना समझे कश्ती पर लहर है?
- हुआ एक जैसा सबका क्यों हश्र है?
- ये उनका शहर है...
- रोके क्यों ना रुकता...हर दम ये कहर है?
- है सबके जो ऊपर..कहाँ उसकी मेहर है?
- जानी तेरी रहमत किस्मत जो सिफर है!
- ये उनका शहर है....
- इंसानों को तोले दौलत का ग़दर है!
- नज़र जाए जहाँ तक मौत का मंज़र है!
- उजड़ी बस्तियों मे मेरा घर किधर है?
- ये उनका शहर है...
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- #ज़हन
- हाल ही में आयोजित सूरज पॉकेट बुक्स कार्यक्रम में यह नज़्म मंच पर पढ़ी।
- Posted by Mohit Sharma at 1:30 AM
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- Labels: Art, Book, Event, Mohit (Trendster), Mohit Sharma Poet, Mohitness, nazm, Novel, Shubhanand, Sooraj Pocket Books, Update, मोहित शर्मा ज़हन
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