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- Thursday, January 25, 2018
- रहनुमा अक्स (नज़्म) #mohit_trendster
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- पिघलती रौशनी में यादों का रक़्स,
- गुज़रे जन्म की गलियों में गुम शख़्स,
- कलियों की ओस उड़ने से पहले का वक़्त।
- शबनम में हरजाई सा रंग आया है,
- जबसे तेरे अक्स को रहनुमा बनाया है...
- तेरे दर का सरफिरा रास्ता,
- इश्क़ की डोर में वाबस्ता,
- दिल में मिल्कियत...हाथ में गुलाब सस्ता।
- उपरवाले ने अब मेरी दुआओं का हिसाब बनाया है,
- जबसे तेरे अक्स को रहनुमा बनाया है...
- नारियल सा किसका नसीब,
- माना जिन्हे रक़ीब,
- निकले वो अपने हसीब।
- वक़्त की चुगली में जाने कितना वक़्त बिताया है,
- जबसे तेरे अक्स को रहनुमा बनाया है...
- कहना उनको बात पुरानी हो गयी,
- बचपन की अंगड़ाई जवानी हो गयी,
- बिना पाबंदी मन की मनाही।
- दरख्तों की खुरचन पर दौर की स्याही,
- 12 सालों पर भारी जैसे एक कुम्भ छाया है,
- जबसे तेरे अक्स को रहनुमा बनाया है...
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- #ज़हन
- Thumbnail Art - Gaston S Garcia
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- https://soundcloud.com/user-383137757
- Posted by Mohit Sharma at 12:52 PM
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- Labels: Hindi, Life, Mohit (Trendster), Mohitness, nazm, Poem, Romantic, Urdu, what if, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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