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- Wednesday, July 13, 2016
- राष्ट्र-प्रकृति (कहानी) #mohitness
- दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक सीन की राजधानी चीबिंग में 5 दिवसीय विश्व सम्मलेन होने वाला था जिसमे लाखों की संख्या में लोग आने की सम्भावना थी। लगभग उसी समय चीबिंग और आस-पास के क्षेत्रों में लगातार कुछ दिन भारी बारिश होने के आसार बन रहे थे। सीन के तानाशाह राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों से एक मौसमी प्रयोग करने को कहा जिस से इन 5 दिनों के सम्मलेन में मौसम का कोई व्यवधान ना पड़े। बड़े कार्गो हवाई जहाज़ों की मदद से लगातार हवा की ऊपरी परतों में रसायन छोड़े गए और तरह-तरह के वैज्ञानिक चोचले हुए। आखिरकार दबाव का क्षेत्र बदला और बादल-बरखा चीबिंग से छितर गए।
- सम्मेलन अच्छी तरह निपटा और अहम मौके पर मौसम को मात देने की ख़ुशी में राष्ट्रपति छुट्टी मनाने देश के तटीय छोर पर आ गए। दबाव के क्षेत्र में बदलाव से देश का वातावरण उलट-पुलट हो गया। विश्व सम्मलेन में मौसम से की गयी छेड़छाड के कारण अचानक एक ऐसा तूफ़ान तेज़ी से सीन के तटीय क्षेत्रों की तरफ खिंचा चला आया जो सामान्य स्थिति में समुद्र तक सीमित रहता। ग्लाइडर पर प्रकृति का आनंद ले रहे राष्ट्रपति का प्रकृति ने आनंद ले लिया और उन्हें एक क्षतिग्रस्त न्यूक्लियर संयंत्र के कोर में ला पटका। सीन में भारी जान-माल का नुक्सान हुआ और बचाव कर्मियों ने विकिरण स्नान किये राष्ट्रपति को कोमा की हालत में पाया।
- समाप्त!
- - मोहित शर्मा ज़हन
- Posted by Mohit Sharma at 8:18 AM
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- Labels: Bonsai Kathayen, Fiction, Laghu Katha, Message, Mohit Sharma Trendster, Mohitness, nature, Story, Visit, ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh 226002, India
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