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- Sunday, March 5, 2017
- दूजी कोख में 'अपना' बच्चा (कहानी)
- Artwork - Kishore Ghosh
- "यह सर राजस्थान कहाँ पैसे भेज रहे हैं पिछले कुछ समय से? किसी कोर्ट केस में फँस गए क्या? इतने सालो से विदित सर के साथ हूँ, ऐसा कुछ छुपाते तो नहीं हैं वो मुझसे।" स्टील व कपडा उद्योगपति पंकज जाधव के अकाउंटेंट सुमंत ने उनके सेक्रेटरी कुणाल से पूछा।
- कुणाल को तो जैसे यह बात बाँटने का बहाना चाहिए था।
- "एक औरत ब्लैकमेल कर रही है सर को..."
- सुमंत ने उत्साह में कुणाल की बात काट कर उसका आधा वाक्य खा लिया।
- सुमंत - "ओह! अपने सर भी गलत आदमी निकले! यह समझ नहीं आया कि मुझसे इनकी ये आदत अबतक छुपी कैसे रही?"
- कुणाल - "सुमंत के बच्चे, बात तो पूरी करने दिया कर। वो औरत सर और रुचिका मैम दोनों को ब्लैकमेल कर रही है। सरोगेसी का मामला है।"
- सुमंत - "सॉरी भाई, बात ऐसी थी कि रहा नहीं गया। सरोगेसी यानी किसी और औरत की कोख से अपना बच्चा करवाना? बेचारी रुचिका मैडम..."
- कुणाल - "बेचारी नहीं हैं तभी तो ब्लैकमेल किया जा रहा है। मैंने इनकी बातें सुनी हैं, पंकज सर और मैम दोनों पूरी तरह ठीक हैं और बच्चा कर सकते थे पर मैडम 9 महीनो की टेंशन और बच्चा जनने का दर्द नहीं सहना चाहती थी। बच्चे के बाद बिगड़ने वाले फिगर की भी रुचिका मैम को चिंता थी, तो दोनों ने IVF तकनीक से अपने शुक्राणु-अंडाणु से बना भ्रूण एक राजस्थानी औरत की किराये पर खरीदी कोख में रखवा दिया। 9 महीने बाद प्राकृतिक रूप से इनके अंश का बच्चा, दोनों के डीएनए के गुण लेकर जन्म लेता जिसका जन्म देने वाली सरोगेट माँ से कोई नाता नहीं होता। इस काम में जिस एजेंट ने इनकी मदद की थी जब उसको पंकज सर के बड़े बिज़नस के बारे में पता चला तो उसने उस औरत को भड़काया कि 'देख देश का इतना बड़ा व्यापारी 9 महीने के कष्ट के कितने कम पैसे दे रहा है तुझे', फिर उस औरत ने इन्हें कोर्ट, मीडिया में जाने की धमकी दी। अब बच्चा होने में 2 महीने हैं, बात बाहर निकलेगी तो जनता में इनकी इमेज धूमिल हो जाएगी। दूर के ही सही नाते-रिश्तेदारो को जो रुचिका मैम की झूठी प्रेगनेंसी की बात बता रखी है उसपर दर्जनों बाते होंगी सो अलग, इसलिए हर हफ्ते लाखो रूपया भेजा जा रहा है।"
- सुमंत - "इतना झंझट करने की ज़रुरत ही क्या थी? इस से अच्छा तो किसी बेचारे अनाथ बच्चे या बच्ची को गोद ले लेते।"
- कुणाल - "तू बहुत भोला है यार! वो अनाथ बच्चा इनका 'अपना' थोड़े ही होता।"
- समाप्त!
- #मोहित_शर्मा_ज़हन
- Read Parallel (Terminal Tributaries) - Vibhuti Dabral, Mohit Trendster
- Parallel Comic Link 2
- Posted by Mohit Sharma at 5:23 PM
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- Labels: double standards, Fiction, Life, Message, Mohit (Trendster), Mohitness, Satire, Social, Society, Story, ट्रेंडस्टर, मोहित शर्मा ज़हन
- Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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