Mohit-Trendster

Roohani Natak (Kahani) #mohitness

Apr 15th, 2017
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  1. Saturday, April 15, 2017
  2. रूहानी नाटक (कहानी) #ज़हन
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  4. मेरा नाम कृष्णानंद है और लोग मुझे किशन कहकर बुलाते हैं। 9 साल की उम्र में अपने गांव से बिना सोचे लखनऊ आया, वैसे सोचकर भी क्या कर लेता...नौ साल का दिमाग क्या सलाह देता? सीखने में आम बच्चो जैसा नहीं था तो मुझे मंदबुद्धि कहा जाता था, सोने पे सुहागा यह कि मैं हकलाता था। शहर तो आ गया पर यहाँ रहने लायक कोई काम भी तो आना चाहिए था। एक थिएटर उस्ताद ने अपनी शरण में लिया और मैं उनके रंगमंच में साफ़-सफाई, कपड़ो-मंच का रखरखाव जैसे काम करने लगा। दूर से नाटक के कलाकारों को देखते हुए कई बार उनकी टोली में मिल जाने मन किया पर फिर अपनी कमियों को देखकर खुद को रोक लिया। अक्सर सबके जाने के बाद खाली थिएटर में पूरे मन के साथ घंटो अपने बनाये 'शो' करता। ऐसा करते हुए कितने साल बीत गए। आज जब किसी तरह हिम्मत कर के उस्ताद को यह बात बतानी चाही तो पूरी टोली मुझपर हँसने लगी। मेरे बात करने के लहज़े का ना जाने कितना मज़ाक उड़ाया गया। यकीन नहीं हुआ ये सब वही लोग हैं जो सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने की बातें करते हैं, जागरूकता फैलाते हैं। अब और कितना संघर्ष करूँ? जीवन भर घिसट-घिसट के क्यों बिताऊं? क्या फायदा इन सबके बीच रहकर इस अधूरे जीवन को बिताने का? इस से बढ़िया तो मैं पैदा ही ना हुआ होता! अभी देर नहीं हुई है, मैं खुदखुशी कर लूँगा।
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  8. "किस ख़ुशी में कर लोगे खुदख़ुशी? हम करने ही नहीं देंगे!"
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  10. (**सामने के नज़ारे से किशन की आवाज़ गुम हो गई इसलिए नैरेटर को टेकओवर करना पड़ रहा है।**)
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  12. छत के बाहर की ओर टांग लटकाये बैठे किशन को झटका लगा और वह अंदर आकर गिरा। उसके सामने अलग-अलग मानव आकृतियों वाले भूत खड़े थे। उनकी मुखिया एक सुन्दर परी सी आत्मा बोल रही थी। अचानक जैसे उसके मोनोलॉग को सुन रही काल्पनिक प्रकृति जागृत हो गयी। किशन डर से जड़ हो गया।
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  14. "डरो मत किशन! हम सब तुम्हे कुछ बातें बताने आएं हैं। कभी सोचा है रोज़ तुम आराम से उठते थे, हर दूसरे दिन तुम्हे लगता था कि आज तो तुम्हे पक्का देर हो जायेगी पर कभी ऐसा हुआ नहीं। तुम्हारे कमरे का किराया, बिजली-पानी का खर्च तुम्हारी मासिक आय से काट लें तो 50 रुपये बचते हैं...पर जब भी तुम्हारा मन कोई मिठाई, आइस क्रीम खाने को होता, किसी गरीब की मदद करने को होता तो तुम्हारी जेब से ज़रुरत भर के पैसे निकल आते। थिएटर टोली में सब कहते हैं कि किशन कभी बीमार नहीं पड़ता, सही कहते हैं। उन्हें यह नहीं पता कि तुम्हे कभी चोट भी नहीं लगती। तुम्हारे घर पर हर महीने माँ-बाप के खर्चे लायक मनी आर्डर जाता है....अरे वो तो छोडो, एक मित्र से तुम्हे ना कहने मे दिक्कत हुई और तुमने उस से जीवन बीमा पॉलिसी खरीद ली, फिर भूल गए। उस पॉलिसी का प्रीमियम ढाई साल से हर 3 महीने बिना नागा जमा हो रहा है। कभी सोचा है यह सब कैसे हो रहा है? कौन और क्यों कर रहा है?
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  16. कैसे सोचोगे? तुम बहुत भोले हो! तुम्हारी कला और मन में मिलावट नहीं है। किसी को दिखाने के लिए लोग जो आडम्बर ओढ़ते हैं उससे तुम कोसो दूर हो। हम सब हर रात तुम्हारे नाटक देखने आते हैं। अब तो बाहर के शहरों के भूत तक सिर्फ तुम्हारे लिए यहाँ आते हैं। जब तुम अपने सोचे नाटकों पर माइम करते हुए दर्जन किरदारों के स्वांग रचते हो तो तुम्हारे रचना संसार के आगे बाहर की दुनिया बहुत छोटी लगने लगती है। दिनभर जिस संकोच और शर्म के पीछे कुछ शब्द बोलने से डरते हो, रात में उतनी ही गहनता से हकलाते हुए जब संवाद बोलते हो तो फिर जन्म लेकर तुम्हारे साथ रहने का मन करता है। जिस जीवन को इतनी आसानी से छोड़ने की बात कर रहे हो उसके केवल कुछ क्षणों के लिए हम सब आत्माएं अतृप्त घूम रही हैं।"
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  18. किशन का मन हल्का हुआ कि उसकी कला के हज़ारों कद्रदान हैं। उसने फिर से शुरुआत की और कुछ समय बाद अपने रूहानी कद्रदानों की मदद से लखनऊ मे एक सरप्राइज थिएटर शो बुक किया। शो के अनोखे प्रचार से कई वहाँ पहुंचे, जिनमे किशन का उस्ताद और उसकी उत्सुक टोली भी शामिल थी। किशन की मेहनत रंग लाई और सबको अपनी प्रतिभा से चौंकाते हुए उसने एक हिट शो दिया। टोली को अपनी बड़ी भूल का एहसास हुआ और किशन के माइम, कहानी के अनुसार उन लोगो ने कुछ अलग नाटक रचे। अब वह थिएटर किशन के नाम से जाना जाता है। हाँ, आज भी अक्सर किशन रात में खाली फिर भी 'भरे हुए' थिएटर में अपनी नाट्य प्रस्तुति देता है।
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  20. समाप्त!
  21. #मोहित_शर्मा_ज़हन #mohit_trendster
  22. Posted by Mohit Sharma at 2:56 AM
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  29. Labels: Fiction, Hindi, Mohit Sharma Trendster, Mohitness, Story, what if, ट्रेंडस्टर
  30. Location: Lucknow, Uttar Pradesh, India
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